कुछ अजीब, कुछ अनोखा, है कहानी २०२० की,
रे मनुष्य, सुनो, ये साल है प्रकृति की तांडव की!
कुछ करने का सपना लेकर चले थे हम जनवरी में,
आशा व अभिलाषा के साथ थे हम पूरे जोश में!
जब वसंत ऋतु का आगमन हुआ था फरवरी में,
क्वारंटाइन का मतलब थोड़ी पता था वालेंटाइन में!
छात्रावास जब छोड़कर आना पड़ा था मार्च में,
बड़े दिनों बाद छुट्टियों का उमंग था हमारे मन में!
लेकिन जब लॉकडाउन शुरू हुआ था अप्रैल में,
पता चला था थोड़ा-थोड़ा कॉरोना के बारे में!
एक तरफ दौड़ था ऑनलाइन क्लास का मई में,
सुहाना लग रहा था वेबिनार व वर्चुअल मीटिंग में!
दूसरे तरफ जोर-शोर का प्रचार गणमाध्यम का जून में,
पूरी दुनिया कांप रही थी कोरॉना के भय व प्रकोप में!
जैसे तैसे तो पढ़ाई चल रही थी जुलाई के महीने में,
पूरी बंद हो गई परीक्षा न होने की सरकारी निष्पति में!
लॉकडॉउन शटडॉउन का ज़ोर चला था अगस्त में,
हम तो व्यस्त थे ऑनलाइन प्रतियोगिता के शोर में!
फिर जब चालू हुआ अनलॉक सितंबर के महीने में,
ढूंढनी पड़ी किताबें फिर से परीक्षा होने की राय में!
ऑनलाइन परीक्षा में फ़से थे हम जब अक्टूबर में,
चंचल मन तो झूम रहा था नवरात्रि के रास में!
दशहरा के बाद आया त्योहार दीवाली नवंबर में,
पर हम तो चिंतित थे हमारे परीक्षा के परिणाम में!
हाय! अब तो लक्ष्यहिन बैठे हैं हम दिसंबर में,
क्या करें, क्या न करें, इस असमंजस में!!!
और कोरॉना का साथ देने आए कई तूफ़ान,
उफ़! ये क्या हो रहा है, हम तो रह गए हैरान!
अब तो सिर्फ़ भगवान ही भरोसा है २०२१ में,
जल्द आ जाए टिका, अगले साल के प्रारम्भ में!
निर्मल हो गया परिवेश, हो गया प्रदूषण मुक्त,
प्रार्थना तो यही है, जल्द हो जाए कोरॉना लुप्त!
Jasmine Panda